"तुम दोनों इतनी बारिश में खेलना चाहते हो. हैं? अगर माँ को पता चल गया तो पिटाई हो जायगी. फिर मैं तुम्हे बचाने नहीं आने वाला...अभी बता रहा हूँ. ऊपर से दोनों बीमार और पड़ोगे."
"लेकन चौकिदारजी हम दोनों के पास छाता है. हम अपने छाते ले कर तो जा सकते है."
"तुम दोनों बहुत ही शरारती बच्चे हो...किसी की नहीं सुनते..मैं तो चला...जब पिटाई होगी तो मेरे पास रोते हुए मत आना."
"अब क्या करे दादा?"
"एक काम करते है...मम्मी के आने से पहले ही भाग जाते हैं."
"अच्छा बच्चू! अगर मम्मी को पता चल गया तोह जो मार पड़ेगी, उसका क्या बुद्धू मल?"
"मैं तो जा रहा हूँ खेलने, तुम बैठो घर पे....डरपोक चुहिया!"
"डरपोक होगे तुम!"
"हा हा हा! डरपोक डरपोक डरपोक!!! मोनू को बताऊंगा की तुम कितनी बड़ी चुहिया हो! बाय!"
"अरे ये तो गया! मैं भी जाती हूँ. मम्मी के आने से पहले ही आ जाऊँगी, दादा को बिना बताये, और जो मज़ा आएगा जब मम्मी से पिटाई मिलेगी! फिर देखेंगे चुहिया कौन है!"
"अरे दादा! रुको मैं भी चल रही हूँ!"













12 comments:
:)
Great simplicity in words & pictures Kannagi. Absolutely beautiful :)
amazingly simple story conveyed very beautifully.. great work..
Taksh :)
so cute talking pics.. thy are really a team..
innocent and simple...
I like the umbrellas. How much?
And what does all the written stuff mean?
hahahaaha...Baba Bub...its hindi!
Fadu
Thankyou! :D
bahut hi badiya likha hai.. photographs bhi mazedaar hain.. shukriya share karne k liye..
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bahut acha
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